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आजकल बच्चे मां बाप की सेवा क्यों नही करते इसका ज्योतिष, विज्ञान, और वैदिक आधार पर विवेचन

   प्रेम प्राप्त करने के पीछे भागना मूर्खता और हमारी कमजोरी होती है। यही बात इस पर भी लागू होती है की आजकल के बच्चे मां बाप की सेवा क्यों नही करते। 
   जैसे ऊर्जा या पानी हाई लेवल से लो लेवल की और ही जा सकती है इसी प्रकार प्रेम जो की एक प्रकार की मानसिक ऊर्जा है इसका प्रवाह भी एक तरफा ही होता है। इसीलिए अगर आप अपने बच्चों का प्रेम प्राप्त करना चाहते है तो आपको चाहिए की आप अपने बड़े बूढ़ों से ज्यादा प्रेम कीजिए ना की अपने बच्चों से। तभी यह धारा उल्टी बह सकती है। आपको प्रेम को उल्टा बहाने के लिए जीवन की ढलान भी उल्टी करनी  पड़ेगी।   लेकिन आप करते उल्टा है अपने घर के बड़े बूढ़ों के बजाए आप अपने बच्चों को आप ज्यादा प्रेम प्यार करते है तो यह बात निश्चित है की प्रेम के बहने की ढलान आपसे बच्चों की तरफ ज्यादा है तो प्रेम भी आगे की तरफ ही बहेगा वो बच्चे भी आप से ज्यादा प्रेम अपने बच्चों को देंगे। तो फिर आप क्यों रोते हो। जो आपने खुद किया या कर रहे हैं वही काम आपके बच्चे भी कर रहे हैं।
   आप इस ढलान को उल्टा कर दो अपने बच्चों के बजाए अपने बड़े बूढ़ों को ज्यादा प्रेम करो। स्थिति खुद ब खुद बदल जायेगी।
    अब ऐसा तो हो नहीं हो सकता कि आपको दोनो तरफ से प्रेम मिले आपके बड़े बूढ़े भी आपको प्रेम करे और आपको आपके बच्चे भी प्रेम करे। दोनो तरफ का प्रवाह एक दिशा में नही हो सकता है। अब जैसा चाहते हो वैसा कर लो आपके हाथ में हैं।
  अगर आप चाहते है की आपके बच्चे आपकी बात कहना माने तो अपनी प्रेम की ऊर्जा के प्रवाह को उल्टा कर दें। लेकिन बहुत से मां बाप आजकल बच्चा पैदा होते ही उसके भविष्य में उसे डॉक्टर इंजीनियर या कुछ और बड़ा आदमी बनाने के लिए धन संचय करना शुरू कर देते हैं और सारा समय उसकी सेवा देखभाल में लगा देते है लेकिन सौ प्रतिशत कहता हूं भविष्य आपकी सोच से बिल्कुल उल्टा होगा। 
   अगर बच्चे का भविष्य अच्छा चाहिए तो प्रेम की धारा अपने बड़े बूढ़ों की और मोड़ दीजिए। क्योंकि प्रेम वही प्राप्त करता है जो कमजोर होता है। जो सबसे कामयाब होता है उसे प्रेम की नही  प्रेम की कमी की आवश्यकता होती है।
 ये जो आजकल संस्कार विहीन उच्च मध्यम वर्ग की पप्पू प्रकार की संताने  जिनको किसी की जान से ज़्यादा अपने कुत्ते से प्रेम है, ये इसी का एक उदाहरण है। जो बच्चे इस कदर संस्कार विहीन हैं उनके माँ बाप क्या सोचते हैं कि वे कभी उनके बुढ़ापे का सहारा बनेंगे, अधिकतर ये संतान उन लोगों की हैं जो खुद भी संस्कार विहीन हैं जिन्होंने अपने बड़े बुजुर्गों का अपमान करके सिर्फ़ धन संचय करके अपने नालायक संतानो को डॉक्टर बनाने के सपने देखे , मैं यह बात सब के लिए नही लिख रहा हूँ , लेकिन इन में अधिकतर ऐसे ही लोग हैं।
__By Gopal Kapoor
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