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राजनीतिक समाजशास्त्र: अर्थ एवं परिभाषा

अर्थ:
राजनीतिक समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो समाज और राजनीति के बीच के अटूट संबंधों का अध्ययन करता है। यह विषय इस बात पर केंद्रित है कि सामाजिक परिवेश (Social Environment) किस प्रकार राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करता है और राजनीति किस प्रकार समाज की संरचना को बदलती है। सरल शब्दों में, यह राजनीति का समाजशास्त्रीय अध्ययन है।

परिभाषाएँ:

  • एस. एम. लिपसेट: "राजनीतिक समाजशास्त्र वह विषय है जो समाज के विभिन्न अंगों के बीच अंतर्संबंधों और राजनीति के बीच के संबंधों का अध्ययन करता है।"
  • बेंडिक्स: "राजनीतिक समाजशास्त्र समाजशास्त्र की वह शाखा है जो सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं (Interactions) को स्पष्ट करती है।"

राजनीतिक समाजशास्त्र की 14 प्रमुख विशेषताएँ

राजनीतिक समाजशास्त्र की प्रकृति और कार्यक्षेत्र को समझने के लिए इसकी निम्नलिखित विशेषताएँ महत्वपूर्ण हैं:

  1. अंतःविषय अध्ययन: यह राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र दोनों के सिद्धांतों का मिश्रण है।
  2. शक्ति का अध्ययन: यह समाज में शक्ति के स्रोत, उसके वितरण और प्रयोग पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करता है।
  3. राजनीतिक समाजीकरण: यह बताता है कि परिवार, शिक्षा और समाज के माध्यम से व्यक्ति में राजनीतिक समझ कैसे विकसित होती है।
  4. मतदान व्यवहार का विश्लेषण: सामाजिक कारक (जैसे जाति, धर्म) मतदान को कैसे प्रभावित करते हैं, यह इसकी प्रमुख विशेषता है।
  5. राजनीतिक सहभागिता: नागरिक राजनीति में कितनी रुचि लेते हैं और क्यों, इसका अध्ययन इसमें किया जाता है।
  6. वैधता और सत्ता: समाज किसी नेता या शासन को 'सही' या 'वैध' क्यों मानता है, इसका विश्लेषण यहाँ होता है।
  7. दबाव समूहों का अध्ययन: समाज के विभिन्न हित समूह (जैसे किसान संघ, छात्र संघ) सरकार पर कैसे दबाव डालते हैं।
  8. सामाजिक संघर्ष का विश्लेषण: समाज के विभिन्न वर्गों के बीच होने वाले राजनीतिक संघर्षों और उनके कारणों का अध्ययन।
  9. अभिजन वर्ग (Elite Class) का अध्ययन: समाज के मुट्ठी भर प्रभावशाली लोग राजनीति को कैसे नियंत्रित करते हैं।
  10. राजनीतिक संस्कृति: किसी समाज के लोगों की राजनीति के प्रति सोच, विश्वास और मूल्यों का अध्ययन करना।
  11. नौकरशाही का सामाजिक स्वरूप: सरकारी तंत्र और अधिकारियों का समाज के साथ संबंध कैसा है।
  12. राजनीतिक संचार: सूचनाएँ और विचार समाज से सरकार तक और सरकार से समाज तक कैसे पहुँचते हैं।
  13. सामाजिक परिवर्तन और राजनीति: राजनीतिक निर्णय समाज में क्या बदलाव लाते हैं और सामाजिक बदलाव राजनीति को कैसे मोड़ते हैं।
  14. अनुभवजन्य और वैज्ञानिक पद्धति: यह केवल कल्पना पर आधारित नहीं है, बल्कि सर्वेक्षण और ठोस आंकड़ों के आधार पर निष्कर्ष निकालता है।

निष्कर्ष: राजनीतिक समाजशास्त्र हमें यह सिखाता है कि राजनीति केवल संसद या विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे परिवार, समाज और दैनिक जीवन की सामाजिक संरचनाओं से गहराई से जुड़ी हुई है।

राजनीतिक समाजशास्त्र: अर्थ एवं परिभाषा

अर्थ: राजनीतिक समाजशास्त्र समाजशास्त्र की वह शाखा है जो राजनीति और समाज के आपसी संबंधों को समझती है। यह देखता है कि कैसे हमारे सामाजिक रीति-रिवाज, जाति और धर्म हमारी राजनीति को प्रभावित करते हैं।

परिभाषाएँ:

  • एस. एम. लिपसेट: "यह समाज और राजनीतिक व्यवस्था के बीच के संबंधों का अध्ययन है।"
  • बेंडिक्स: "यह विषय सामाजिक व्यवस्था और राजनीति के बीच होने वाले लेन-देन की व्याख्या करता है।"

राजनीतिक समाजशास्त्र की 14 सरल विशेषताएँ

1. दो विषयों का मेल: यह राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र दोनों को जोड़कर बनाया गया है।

2. शक्ति पर जोर: यह देखता है कि समाज में असली ताकत किसके हाथ में है और वह कैसे चलती है।

3. राजनीति सीखने की प्रक्रिया: इसमें पढ़ा जाता है कि बच्चा बड़ा होकर अपनी राजनीतिक राय कैसे बनाता है।

4. वोट देने का तरीका: इसमें जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर लोगों के वोट देने के व्यवहार का अध्ययन होता है।

5. जनता की भागीदारी: यह देखता है कि आम लोग राजनीति में कितना हिस्सा लेते हैं और क्यों।

6. सरकार की मंजूरी: समाज किसी सरकार की बातों को क्यों स्वीकार करता है, इसका कारण ढूँढता है।

7. दबाव डालने वाले समूह: किसान, मजदूर या छात्र संगठन सरकार से अपनी बातें कैसे मनवाते हैं।

8. समाज में टकराव: समाज के अलग-अलग ग्रुप्स के बीच होने वाले झगड़ों और राजनीति पर उनके असर को समझता है।

9. खास लोगों का दबदबा: समाज के अमीर और ऊँचे लोग राजनीति को कैसे घुमाते हैं, इसका अध्ययन करता है।

10. राजनीतिक सोच: किसी देश या समाज के लोगों की राजनीति के प्रति सोच और पसंद कैसी है।

11. सरकारी अधिकारी और समाज: सरकारी अफसरों का काम करने का तरीका समाज से कैसे प्रभावित होता है।

12. सूचनाओं का फैलाव: राजनीतिक खबरें और बातें जनता तक कैसे पहुँचती हैं और उनका क्या असर होता है।

13. समाज में बदलाव: नई राजनीति समाज को कैसे बदलती है और समाज राजनीति को कैसे नया रूप देता है।

14. असलियत पर आधारित: यह केवल अनुमान नहीं लगाता, बल्कि सर्वे और डेटा के आधार पर सच बताता है।


निष्कर्ष: यह विषय हमें समझाता है कि राजनीति समाज से अलग नहीं है, बल्कि समाज का ही एक हिस्सा है।

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